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याज्ञवल्क्य • अध्याय 1 • श्लोक 14
मांसपाञ्जालिकायास्तु यन्त्रलोकेऽङ्गपञ्जरे। स्न्नायवस्थिग्रन्थिशालिन्याः स्त्रियाः किमिव शोभनम्॥
मांस मेदा आदि द्वारा निर्मित, यत्र-तत्र गमन करने वाली पिटारी रूप नारी के शरीर में, जिसमें कि नसे, हड्डी एवं ग्रन्थियाँ ही स्थित हैं, कौन-सी वस्तु शोभनीय है।
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