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वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 7
शृणु सर्वमिदं दैत्य विष्णोर्माहात्म्यमुत्तमम् । विष्णौ जगत् स्थितं सर्वमिति विद्धि परंतप ॥
शत्रुओं को सन्ताप देने वाले दैत्य! भगवान् विष्णु का यह सम्पूर्ण उत्तम माहात्म्य सुनो - तुम्हें यह मालूम होना चाहिये कि यह समस्त संसार भगवान् विष्णु में ही स्थित है।
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