मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 66
प्रजाविसर्गं च सुखेन काले प्रत्येत्य देवेषु सुखानि भुक्त्वा । सुखेन संयास्यथ सिद्धसंख्यां मा वो भयं भूद् विमलाः स्थ सर्वे ॥ ॥ इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि वृत्रगीतासु द्वितीयोऽध्यायः ॥ ॥ वृत्रगीता सम्पूर्णा ॥
सृष्टि-चक्र के नियत समय पर तुम पुनः जन्म ग्रहण करोगे, और देवलोकों में दिव्य सुखों का भोग करने के पश्चात्, सुखपूर्वक सिद्धों की अवस्था को प्राप्त हो जाओगे। अतः तुम लोगों को किसी प्रकार का भय न हो; तुम सभी विमल (शुद्ध और पवित्र) हो। ॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत के शान्तिपर्व के मोक्षधर्मपर्व में स्थित वृत्रगीता का द्वितीय अध्याय समाप्त हुआ। ॥ ॥ वृत्रगीता सम्पूर्ण हुई।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें