सृष्टि-चक्र के नियत समय पर तुम पुनः जन्म ग्रहण करोगे, और देवलोकों में दिव्य सुखों का भोग करने के पश्चात्,
सुखपूर्वक सिद्धों की अवस्था को प्राप्त हो जाओगे।
अतः तुम लोगों को किसी प्रकार का भय न हो; तुम सभी विमल(शुद्ध और पवित्र) हो।
॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत के शान्तिपर्व के मोक्षधर्मपर्व में स्थित वृत्रगीता का द्वितीय अध्याय समाप्त हुआ। ॥
॥ वृत्रगीता सम्पूर्ण हुई। ॥
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