मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 63
हारिद्रवर्णे रक्ते वा वर्तमानस्तु पार्थिव । तिर्यगेवानुपश्येत कर्मभिस्तामसैर्वृतः ॥
पृथ्वीनाथ! पीतवर्ण वाले देवसर्ग में तथा रक्तवर्ण वाले अनुग्रहसर्ग में विद्यमान प्राणी कभी तामस कर्मों से आवृत होकर तिर्यग्योनि का भी दर्शन कर सकता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें