मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 60
सर्वाण्यशून्यानि करोत्यनन्तः सनातनः सञ्चरते च लोकान् । स चानिरुद्धः सृजते महात्मा तत्स्थं जगत् सर्वमिदं विचित्रम् ॥
वह अनन्त और सनातन भगवान् समस्त लोकों को शून्य होने से बचाकर उनकी सत्ता को बनाए रखते हैं और स्वयं भी समस्त लोकों में विचरण करते हैं। वही महात्मा अनिरुद्ध इस विविध और विचित्र जगत् की सृष्टि करते हैं, और यह सम्पूर्ण जगत् उन्हीं में स्थित है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें