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वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 6
सनत्कुमारस्तु ततः श्रुत्वा प्राह वचोऽर्थवत् । विष्णोर्माहात्म्यसंयुक्तं दानवेन्द्राय धीमते ॥
तत्पश्चात् सनत्कुमार ने यह निवेदन सुनकर, उस बुद्धिमान् दानवेन्द्र के लिए अर्थपूर्ण वचन कहे। उनके वे वचन भगवान् विष्णु के माहात्म्य से युक्त थे।
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