केशव और अच्युत को उस परम तत्त्व का एक चतुर्थांश(तुरीय अंश) जानो।
और वही बुद्धिमान् प्रभु अपने उस चतुर्थांश के भी आधे भाग से तीनों लोकों का पालन और धारण करते हैं।
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