भीष्मजी ने कहा - युधिष्ठिर! मूल कारणरूप से स्थित, महान् देव, महामनस्वी भगवान् नारायण हैं। वे अपने उस चिन्मय स्वरूप में स्थित होकर अपने प्रभाव से नाना प्रकार के सम्पूर्ण पदार्थों की सृष्टि करते हैं।
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