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वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 54
प्रवृत्तमेतद् भगवन् महर्षे महाद्युतेश्चक्रमनन्तवीर्यम् । विष्णोरनन्तस्य सनातनं तत् स्थानं सर्गा यत्र सर्वे प्रवृत्ताः । स वै महात्मा पुरुषोत्तमो वै तस्मिन् जगत् सर्वमिदं प्रतिष्ठितम् ॥
भगवन्! महर्षे! महातेजस्वी, अनन्त एवं सर्वव्यापी भगवान् विष्णु का यह अमित शक्तिशाली संसार चक्र चल रहा है। यह भगवान् विष्णु का वह सनातन स्थान है, जहाँ से सारी सृष्टियों का आरम्भ होता है। महात्मा विष्णु पुरुषोत्तम हैं। उन्हीं में यह सम्पूर्ण जगत् प्रतिष्ठित है।
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