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वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 52
इत्येतदाख्यातमहीनसत्त्व नारायणस्येह बलं मया ते ॥
हे अहीनसत्त्व (महान् साहस और धैर्य से युक्त)! इस प्रकार मैंने तुम्हें यहाँ भगवान् नारायण के माहात्म्य, शक्ति और परम प्रभाव का वर्णन कर दिया है।
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