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वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 5
तमासीनं महाप्रज्ञमुशना वाक्यमब्रवीत्। ब्रह्यस्मै दानवेन्द्राय विष्णोर्माहात्म्यमुत्तमम् ॥
जब महाज्ञानी सनत्कुमार आराम से बैठ गये, तब शुक्राचार्य ने उनसे कहा - 'भगवन्! आप इस दानवराज को भगवान् विष्णु का उत्तम माहात्म्य बताइये।'
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