मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 49
ये तु च्युताः सिद्धलोकात् क्रमेण तेषां गतिं यान्ति तथानुपूर्व्या । जीवाः परे तद् बलतुल्यरूपाः स्वं स्वं विधिं यान्ति विपर्ययेण ॥
जो जीव सिद्धलोक से च्युत हो जाते हैं, वे भी क्रमशः उसी नियत मार्ग का अनुसरण करते हुए अपनी-अपनी गति को प्राप्त होते हैं। अन्य उच्च जीव, जो बल और स्वरूप में उनके समान होते हैं, वे भी अपने-अपने नियत विधान के अनुसार, क्रमशः विभिन्न अवस्थाओं को प्राप्त करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें