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वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 49
ये तु च्युताः सिद्धलोकात् क्रमेण तेषां गतिं यान्ति तथानुपूर्व्या । जीवाः परे तद् बलतुल्यरूपाः स्वं स्वं विधिं यान्ति विपर्ययेण ॥
जो योगी सिद्धलोक से गिरकर मृत्युलोक में आये हैं, उनके समान साधनबल से सम्पन्न जो अन्य योगी हैं, वे भी एक लोक से दूसरे लोक में ऊपर उठते हुए क्रमशः उन सिद्ध पुरुषों की ही गति को प्राप्त होते हैं। परंतु जो वैसे नहीं हैं, वे विपरीतभाव के कारण अपनी-अपनी गति को प्राप्त होते हैं।
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