जो योगी सिद्धलोक से गिरकर मृत्युलोक में आये हैं, उनके समान साधनबल से सम्पन्न जो अन्य योगी हैं, वे भी एक लोक से दूसरे लोक में ऊपर उठते हुए क्रमशः उन सिद्ध पुरुषों की ही गति को प्राप्त होते हैं। परंतु जो वैसे नहीं हैं, वे विपरीतभाव के कारण अपनी-अपनी गति को प्राप्त होते हैं।
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