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वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 47
संहारकाले परिदग्धकाया ब्रह्माणमायान्ति सदा प्रजा हि । चेष्टात्मनो देवगणाश्च सर्वे ये ब्रह्मलोके अपराः स्म तेऽपि ॥
ज्ञानाग्नि के द्वारा जिनके सूक्ष्म, स्थूल और कारण शरीर दग्ध हो गये हैं, वे प्रजाजन अर्थात् योगी लोग प्रलयकाल में सदा परब्रह्म परमात्मा को प्राप्त होते हैं एवं जो ब्रह्मलोक से नीचे के लोकों में रहने वाले साधनशील दैवी प्रकृति से सम्पन्न साधक हैं, वे सब परब्रह्म को प्राप्त हो जाते हैं।
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