किन्तु काल के प्रभाव से वह वहाँ से भी पतित हो सकता है और पुनः अत्यन्त निम्न कृष्ण अवस्था में स्थित हो जाता है।
हे असुरश्रेष्ठ! यह जीवलोक किस प्रकार क्रमशः सिद्धि(परम अवस्था) को प्राप्त करता है, अब मैं तुम्हें उसका वर्णन करूँगा।
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