कृष्णस्य वर्णस्य गतिर्निकृष्टा स सज्जते नरके पच्यमानः ।
स्थानं तथा दुर्गतिभिस्तु तस्य प्रजाविसर्गान् सुबहून् वदन्ति ॥
कृष्ण वर्ण(अत्यन्त तमोगुणप्रधान अवस्था) की गति सबसे निम्न मानी गई है।
इस अवस्था वाला जीव नरक में जाकर दुःखों का भोग करता हुआ आसक्त रहता है।
उसके लिए अनेक प्रकार की दुर्गतियाँ और असंख्य जन्म-मरण के चक्र बताए गए हैं।
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