असुरेन्द्र! देवराज इन्द्र ने मंगलमय तत्त्वज्ञान प्राप्त करके हमारे निकट जिस गति और दर्शन-शास्त्र का वर्णन किया है, वह प्राणियों की वर्णजनित गति है अर्थात् शुक्लवर्ण वालों को वही सिद्धि प्राप्त होती है। वह वर्ण कालकृत माना गया है।
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