दानवराज! शुक्लवर्ण निर्मल, शोकहीन, परिश्रमशून्य होने के कारण सिद्धिकारक होता है। दितिकुलनन्दन! जीव सहस्रों योनियों में जन्म ग्रहण करने के बाद मनुष्य योनि में आकर कभी सिद्धि-लाभ करता है।
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