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वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 3
तयोः संवदतोरेवमाजगाम महामुनिः । सनत्कुमारो धर्मात्मा संशयच्छेदनाय वै ॥
शुक्राचार्य और वृत्रासुर में ये बातें हो ही रही थीं कि वहाँ महामुनि धर्मात्मा सनत्कुमार उनके संशय का निवारण करने के लिये आ पहुँचे।
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