दैत्यराज! अनेक रूपों में प्रकट हुए उन परमात्मा की एकता का यह वेद प्रतिपादन करता है। जीव विज्ञान बल से ही ब्रह्म का साक्षात्कार करता है। उस समय उसकी बुद्धि में वह ब्रह्म प्रकाशित हो जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।