मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 27
ते पृथग्दर्शनास्तस्य संविदन्ति तथैकताम् । एकस्य विद्धि देवस्य सर्वं जगदिदं वशे ॥
यद्यपि वे भिन्न-भिन्न रूपों में दिखाई देते हैं, तथापि वे सभी उसी एक परम तत्त्व की एकता को प्रकट करते हैं। इसलिए यह जानो कि यह सम्पूर्ण जगत् उस एक परम देव के ही अधीन है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें