मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 23
(तं विद्धि भूतं विश्वादिं परमं विद्धि चेश्वरम्।) रजस्तमश्च सत्त्वं च विद्धि नारायणात्मकम् । सोऽश्रमाणां फलं तात कर्मणस्तत् फलं विदुः ॥
उस विश्व के आदि कारण और समस्त भूतों के परम ईश्वर को नारायण ही जानो। रजोगुण, तमोगुण और सत्त्वगुण — इन तीनों को भी नारायणस्वरूप ही समझो। हे तात! आश्रमों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास) के कर्मों का जो फल है, ज्ञानीजन उसे भी उसी नारायण का ही फल मानते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें