उन्हें तुम सम्पूर्ण भूतस्वरूप, इस जगत् का आदिकारण और परमेश्वर समझो। रजोगुण, तमोगुण और सत्त्वगुण - इन तीनों को नारायणमय ही मानो। तात! समस्त आश्रमों का फल वे ही हैं। विद्वान् पुरुष समस्त कर्मों द्वारा प्राप्तव्य फल उन्हीं को मानते हैं।
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