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वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 23
(तं विद्धि भूतं विश्वादिं परमं विद्धि चेश्वरम्।) रजस्तमश्च सत्त्वं च विद्धि नारायणात्मकम् । सोऽश्रमाणां फलं तात कर्मणस्तत् फलं विदुः ॥
उन्हें तुम सम्पूर्ण भूतस्वरूप, इस जगत्‌ का आदिकारण और परमेश्वर समझो। रजोगुण, तमोगुण और सत्त्वगुण - इन तीनों को नारायणमय ही मानो। तात! समस्त आश्रमों का फल वे ही हैं। विद्वान् पुरुष समस्त कर्मों द्वारा प्राप्तव्य फल उन्हीं को मानते हैं।
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