हे दानवश्रेष्ठ! ध्रुव और उसके अधीन स्थित समस्त ग्रह उसी परम पुरुष में प्रतिष्ठित हैं।
नक्षत्रों का चक्र उनके नेत्रों में स्थित है, और हे दानव, पृथ्वी उनके चरणों में स्थित है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।