अनादि और अनन्त, श्रीसम्पन्न, भगवान् हरि नारायण, जो समस्त जगत् के प्रभु हैं, वही देव समस्त स्थावर(अचल) और चर(चल) प्राणियों की सृष्टि करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।