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वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 19
अनादिनिधनः श्रीमान् हरिर्नारायणः प्रभुः । देवः सृजति भूतानि स्थावराणि चराणि च ॥
अनादि और अनन्त, श्रीसम्पन्न, भगवान् हरि नारायण, जो समस्त जगत् के प्रभु हैं, वही देव समस्त स्थावर (अचल) और चर (चल) प्राणियों की सृष्टि करते हैं।
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