प्रभो! जिस प्रकार वे कर्म में प्रवृत्त होते तथा जिस निमित्त से उसमें स्थित होते हैं और जिस अवस्था में उससे निवृत्त हो जाते हैं, वह सब मैं तुमसे क्रमशः बताऊँगा। तुम उसे यहाँ एकाग्रचित्त होकर सुनो!
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