जिस प्रकार थोड़े-से पुष्पों के सम्पर्क में आने पर तिल और सरसों सुगन्धित तो हो जाते हैं, किन्तु वे अपने स्वाभाविक गन्ध को पूर्णतः नहीं छोड़ते,
उसी प्रकार सूक्ष्म तत्त्व(आत्मस्वरूप) का साक्षात्कार भी क्रमशः और गहन साधना के द्वारा ही होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।