मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 11
यथा हिरण्यकर्ता वै रूप्यमग्नौ विशोधयेत् । बहुशोऽतिप्रयत्नेन महतात्मकृतेन ह ॥
जैसे सोनार बारम्बार किये हुए अपने महान् प्रयत्न के द्वारा चाँदी को आग में डालकर उसे शुद्ध करता है, उसी प्रकार जीव सैकड़ों जन्मों में अपने मन को शुद्ध कर पाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें