मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 2 • श्लोक 1
नमस्तस्मै भगवते देवाय प्रभविष्णवे । यस्य पृथ्वीतलं तात साकाशं बाहुगोचरः ॥
शुक्राचार्य ने कहा - तात! आकाशसहित यह सारी पृथ्वी जिनकी भुजाओं के बल पर स्थित है, महान् प्रभावशाली उन भगवान् विष्णुदेव को नमस्कार है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें