जिस प्रकार वायु काजल (अंजन) या मनःशिला के रज (लाल वर्ण के चूर्ण) में प्रवेश करके उसी का वर्ण धारण कर लेता है और दिशाओं को उसी रंग से युक्त प्रतीत कराता है...
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