भीष्मजी ने कहा - महाराज! दुःख अनन्त नहीं हैं। जगत्की सभी वस्तुएँ संख्या की सीमा में ही हैं - असंख्य नहीं हैं। पुनर्जन्म भी नश्वरता के लिये विख्यात ही है। तात्पर्य यह कि इस जगत्में कोई भी वस्तु अचल या स्थायी नहीं है।
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