मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 5
न गच्छन्ति पुनर्भावं मुनयः संशितव्रताः । कदा वयं गमिष्यामो राज्यं हित्वा परंतप ॥
इन सबसे मुक्त हुए तीक्ष्ण व्रतधारी मुनि पुनर्जन्म को नहीं प्राप्त होते हैं। परंतप पितामह! हम लोग भी कब अपना राज्य छोड़कर इसी स्थिति को प्राप्त होंगे?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें