राजसिंह! पुरुषप्रवर युधिष्ठिर! उसके ऐसा प्रश्न करने पर मुनिवर शुक्राचार्य ने उस समय उसे जो उत्तर दिया, उसे मैं बता रहा हूँ, तुम अपने भाइयों के साथ एकाग्रचित्त होकर सुनो।
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