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वृत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 34
इतीदमुक्तः स मुनिस्तदानीं प्रत्याह यत् तच्छृणु राजसिंह। मयोच्यमानं पुरुषर्षभत्व-मनन्यचित्तः सह सोदरीयैः ॥ ॥ इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि वृत्रगीतासु प्रथमोऽध्यायः ॥
राजसिंह! पुरुषप्रवर युधिष्ठिर! उसके ऐसा प्रश्न करने पर मुनिवर शुक्राचार्य ने उस समय उसे जो उत्तर दिया, उसे मैं बता रहा हूँ, तुम अपने भाइयों के साथ एकाग्रचित्त होकर सुनो।
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