इस प्रकार कहे जाने पर उस समय उस मुनि ने उत्तर दिया — "हे राजसिंह! अब जो मैं कहने जा रहा हूँ, उसे तुम अपने भाइयों सहित एकाग्रचित्त होकर सुनो।"
॥ इस प्रकार श्रीमहाभारत के शान्तिपर्व के मोक्षधर्मपर्व में स्थित वृत्रगीता का प्रथम अध्याय समाप्त हुआ। ॥
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