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वृत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 32
कस्माद् भूतानि जीवन्ति प्रवर्तन्ते तथा पुनः । किं वा फलं परं प्राप्य जीवस्तिष्ठति शाश्वतः ॥
प्राणी किस हेतु से जीवन धारण करते हैं? तथा किस कारण से कर्मों में प्रवृत्त होते हैं? जीव किस परम फल को पाकर अविनाशी एवं सनातनरूप से प्रतिष्ठित होता है?
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