महान् ऐश्वर्य और ब्रह्मतेज किस वर्ण(आध्यात्मिक एवं सामाजिक अवस्था) में प्रतिष्ठित होते हैं?
और वह उत्तम ऐश्वर्य पुनः किस प्रकार नष्ट अथवा निवृत्त हो जाता है?
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