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वृत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 30
नूनं तु तस्य तपसः सावशेषमिहास्ति वै। यदहं प्रष्टुमिच्छामि भगवन् कर्मणः फलम् ॥
भगवन्! अवश्य ही मेरी उस तपस्या का कोई अंश अब भी शेष रह गया है, अतः मैं उस कर्मफल के विषय में प्रश्न करना चाहता हूँ।
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