युयुत्सुना महेन्द्रेण पुंसा सार्धं महात्मना ।
ततो मे भगवान् दृष्टो हरिर्नारायणः प्रभुः ॥
महामनस्वी पुरुषप्रवर देवराज इन्द्र जब युद्ध की इच्छा से मेरे सामने आये, उस समय उनके साथ उन्हीं की सहायता के लिये आये हुए सबके प्रभु भगवान् श्रीनारायण हरि का मैंने दर्शन किया था।
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