भगवन्! इस प्रकार मैंने तपस्या के प्रभाव से जो ऐश्वर्य प्राप्त किया था, वह मेरे अपने ही कर्मों से नष्ट हो गया। तथापि मैं धैर्य धारण करके उसके लिये शोक नहीं करता हूँ।
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