वृत्रासुर ने कहा - ब्रह्मन्! आपने तथा दूसरे मनीषी महानुभावों ने यह तो प्रत्यक्ष देखा है कि मैंने पहले विजय के लोभ से बड़ी भारी तपस्या की थी।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।