सृष्टि और स्थिति(उत्पत्ति और पालन) के लिए नियत एवं काल द्वारा परिमित इस सिद्धान्त का वर्णन करते हुए उस को देखकर, भगवान् शुक्राचार्य ने उत्तर दिया।
बुद्धिमान् शुक्राचार्य ने कहा — "हे तात! आप ये अनुचित और भ्रमपूर्ण वचन क्यों कह रहे हैं?"
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