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वृत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 22
कृतान्तविधिसंयुक्तः सर्वो लोकः प्रपद्यते । गतं गच्छन्ति चाध्वानं सर्वभूतानि सर्वदा ॥
समस्त लोक कृतान्त (काल एवं मृत्यु के अटल विधान) के अधीन होकर अपना-अपना मार्ग ग्रहण करते हैं। सभी प्राणी सदा से निर्धारित उस मार्ग पर ही गमन करते हैं, जिस पर उन्हें जाना नियत है।
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