समस्त लोककृतान्त(काल एवं मृत्यु के अटल विधान) के अधीन होकर अपना-अपना मार्ग ग्रहण करते हैं।
सभी प्राणी सदा से निर्धारित उस मार्ग पर ही गमन करते हैं, जिस पर उन्हें जाना नियत है।
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