प्राणी पहले ही सुख-दुःख तथा प्रिय और अप्रिय विषयों में विचरण करके कर्म के अनुसार नरक, तिर्यग्योनि, मनुष्ययोनि अथवा देवयोनि में जाते हैं।
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