एवं संसरमाणानि जीवान्यहमदृष्टवान् ।
यथा कर्म तथा लाभ इति शास्त्रनिदर्शनम् ॥
इस प्रकार मैंने सभी जीवों को जन्म-मरण के चक्कर में पड़ा हुआ देखा है। शास्त्र का भी ऐसा सिद्धान्त है कि जैसा कर्म होता है, वैसा ही फल मिलता है।
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