मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 18
क्षपयित्वा तु तं कालं गणितं कालचोदिताः । सावशेषेण कालेन सम्भवन्ति पुनः पुनः ॥
काल (नियति द्वारा निर्धारित अवधि) से प्रेरित होकर, जीव उस नियत समय को भोगकर समाप्त करते हैं। उसके पश्चात, शेष बचे हुए काल के प्रभाव से वे बार-बार पुनर्जन्म धारण करते रहते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें