क्षपयित्वा तु तं कालं गणितं कालचोदिताः ।
सावशेषेण कालेन सम्भवन्ति पुनः पुनः ॥
इस प्रकार स्वर्ग अथवा नरक में कर्मफलभोग द्वारा निश्चित समय व्यतीत करके भोगने से बचे हुए कर्मसहित काल की प्रेरणा से वे बारम्बार इस संसार में जन्म लेते रहते हैं।
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