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वृत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 17
कालसञ्चोदिता जीवा मज्जन्ति नरकेऽवशाः । परितुष्टानि सर्वाणि दिव्यान्याहुर्मनीषिणः ॥
काल (समय एवं नियति) से प्रेरित होकर जीव विवश होकर नरक में गिरते हैं। और जब वे अनुकूल अवस्था को प्राप्त होते हैं, तब मनीषी जन कहते हैं कि सभी दिव्य लोक एवं सुख उनसे संतुष्ट और अनुकूल हो जाते हैं।
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