काल से प्रेरित हुए जीव अपने पापकर्मों के फलस्वरूप विवश होकर 'नरक में डूबते हैं और पुण्य के फल से वे सब-के-सब स्वर्गलोक में जाकर वहाँ आनन्द भोगते हैं।' ऐसा मनीषी पुरुषों का कथन है।
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