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वृत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 13
अस्मिन्नर्थे पुरा गीतं शृणुष्वैकमना नृप। यथा दैत्येन वृत्रेण भ्रष्टैश्वर्येण चेष्टितम् ॥
हे नृप! इस विषय में पूर्वकाल में कही गई एक कथा को एकाग्रचित्त होकर सुनो, जिसमें ऐश्वर्य से वंचित हो जाने पर दैत्य वृत्र ने जैसा आचरण किया था, उसका वर्णन है।
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