अयत्नसाध्यं मुनयो वदन्ति ये चापि मुक्तास्त उपासितव्याः ।
त्वया च लोकेन च तस्मान्नमस्यामि सामरेण महर्षिसङ्घान् ॥
मुनिगण कहते हैं कि ब्रह्मप्राप्ति अंततः सहजस्वरूप है, और जो मुक्त पुरुष हैं, वे उपासना के योग्य हैं। इसलिए तुम्हें और समस्त लोक को उनका सम्मान करना चाहिए। मैं भी समस्त देवताओं सहित उन महर्षियों के समूहों को नमस्कार करता हूँ।
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