मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
वृत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 12
अयत्नसाध्यं मुनयो वदन्ति ये चापि मुक्तास्त उपासितव्याः । त्वया च लोकेन च तस्मान्नमस्यामि सामरेण महर्षिसङ्घान् ॥
ऋषि-मुनि कहते हैं कि ब्रह्म की प्राप्ति किसी क्रियात्मक यत्न से साध्य नहीं है। इसके लिये तो देवताओं सहित सम्पूर्ण जगत्को और तुमको उन पुरुषों की उपासना करनी चाहिये, जो जीवन्मुक्त हैं; अतएव मैं महर्षियों के समुदाय को नमस्कार करता हूँ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
वृत्रगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

वृत्रगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें