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वृत्रगीता • अध्याय 1 • श्लोक 11
ज्ञानेन हि यदा जन्तुरज्ञानप्रभवं तमः । व्यपोहति तदा ब्रह्म प्रकाशति सनातनम् ॥
जब जीव तत्त्वज्ञान द्वारा अज्ञानजनित अन्धकार को दूर कर देता है, तब उसके हृदय में सनातन ब्रह्म प्रकाशित हो जाता है।
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