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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 96
झगितीच्छां समुत्पन्नामवलोक्य शमं नयेत्‌ | यत एव समुद्भूता ततस्तत्रैव लीयते ॥
पलक झपकते ही उभरने वाली इच्छाओं का अवलोकन कर उन्हें समाप्त कर दें। तब सचमुच (मन) उसी स्रोत में लीन हो जाएगा जहां से वे उत्पन्न हुए हैं।
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