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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 94
चित्ताद्यन्तःकृतिनास्ति ममान्तभांवयेदिति | विकल्पानामभावेन विकल्पैरुज्झितो भवेत्‌ ॥
इस प्रकार चिंतन करने से, अंतःकरण, या मन का आंतरिक उपकरण, इत्यादि मेरे भीतर अस्तित्वहीन है, तो, विकल्प (विचार निर्माण) की अनुपस्थिति में, व्यक्ति विकल्प से मुक्त हो जाता है।
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