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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 88
एवमेव निमील्यादौ नेत्रे कृष्णाभमाग्रतः | प्रसायं भैरवं रूपं भावयम्स्तन्मयो भवेत्‌ ॥
इसी प्रकार आंखें बंद करते समय सामने फैले हुए गहन अंधकार, भैरव स्वरूप का चिंतन करना चाहिए। इस प्रकार वह उसके साथ एक हो जाता है।
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