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विज्ञान भैरव • अध्याय 1 • श्लोक 81
मघ्यजिह स्फारितास्ये मध्ये निक्षिप्य चेतनाम्‌ | होचारं मनसा कुर्वस्ततः शान्ते प्रलीयते ॥
जीभ के मध्य भाग को जो खुला हुआ है उसमें रखकर और चेतना को बीच में फेंककर मानसिक रूप से 'हा' दोहराते हुए मन शांति में विलीन हो जाएगा।
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